मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में शीतला माता मंदिर के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, धान से लदा एक ट्रक अनियंत्रित होकर श्रद्धालुओं और सड़क किनारे की दुकानों की ओर बढ़ गया। इसके बाद ट्रक मंदिर के प्रवेश द्वार से टकरा गया।
कैसे हुआ हादसा?
रिपोर्टों के मुताबिक, घटना रविवार तड़के करीब 1:30 बजे की है। चिनौर रोड की ढलान पर ट्रक पुलिस बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ गया और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। इस दौरान सड़क पर मौजूद श्रद्धालु उसकी चपेट में आ गए। टक्कर से मंदिर के प्रवेश द्वार और दीवार का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया।
हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया और पुलिस तथा प्रशासन की टीमों ने राहत एवं बचाव कार्य किया।
मुख्यमंत्री ने की कार्रवाई
हादसे के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की जांच के निर्देश दिए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ग्वालियर के सिटी पुलिस अधीक्षक को पद से हटाने और आठ अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहन कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।
ट्रक चालक और मालिक गिरफ्तार
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने हादसे के संबंध में ट्रक चालक और मालिक को गिरफ्तार किया है। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। वाहन की तकनीकी स्थिति और बैरिकेडिंग पार करने की परिस्थितियां भी जांच का हिस्सा हैं।
मृतकों के परिजनों को मुआवजे का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। राज्य सरकार ने भी मृतकों के परिजनों के लिए सहायता की घोषणा की है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने धार्मिक स्थलों और मेलों में यातायात नियंत्रण तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही रोकना, बैरिकेडिंग की निगरानी करना और आपातकालीन सेवाओं को तैयार रखना बेहद जरूरी है।
THE REPORTERS की रिपोर्ट: ग्वालियर हादसे की जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि प्रतिबंधित मार्ग पर ट्रक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं। जांच के निष्कर्षों से ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

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